स्वीकृति का स्थान: दर्पण में अपने प्रतिबिंब का सामना करना और स्वयं से शुद्धिकरण
स्वीकृति का स्थान आत्मा से शुद्धिकरण है। इब्न अरबी से सूफी परंपरा तक — दर्पण के प्रतिबिंब का सामना करना, निर्णय से प्रेम तक।
"Yol öğretir, ayna gösterir, ruh tekamül eder."
स्वीकृति का स्थान आत्मा से शुद्धिकरण है। इब्न अरबी से सूफी परंपरा तक — दर्पण के प्रतिबिंब का सामना करना, निर्णय से प्रेम तक।
हृदय और ईश्वरीय सिंहासन — तेरहवीं सदी के कवि युनुस एमरे की अमर पंक्तियों में छिपा सूफी रहस्य: ईश्वरीय एकता (वहदत अल-वुजूद), करुणा और आत्मा की मुक्ति की यात्रा।